26 जनवरी 2020 - 13:46
सूरए ताहा की आयत क्रमांक 112 का अनुवादः  और जो कोई इस स्थिति में भले कर्म करे कि वह मोमिन हो तो उसे न तो किसी अत्याचार का भय होग

सऊदी अरब की सरकार के इशारे पर काम करने वाली ट्रोल सेना सऊदी प्रशासन के विरोधियों पर तो बहुत तेज़ हमले करती है और यह सिलसिला 2015 से चल रहा है जब से नरेश सलमान बिन अब्दुल अज़ीज़ ने सऊदी अरब का तख़्त संभाला है।

सऊदी ट्रोल्ज़ ने हालिया ज़ोरदार हमला अमेज़न पर किया और अमेज़न कंपनी के माध्यम से कोई भी सामान ख़रीदने के बहिष्कार का अभियान चलाया।

सऊदी क्राउन प्रिंस मुहम्मद बिन सलमान पर गंभीर आरोप है कि उन्होंने अमेज़न कंपनी के मालिक जेफ़ बेज़ोस को वाट्सएप मैसेज भेजकर उनका मोबाइल फ़ोन हैक करवाया। सवाल यह है कि अगर इस मामले की जांच हो गई और सुबूत सामने आ गए कि बिन सलमान अमेज़न कंपनी और वाशिंग्टन पोस्ट के मालिक के मोबाइल फ़ोन को हैक करने में लिप्त हैं तो उस स्थिति में सऊदी सरकार के पास क्या विकल्प होगा। अगर इस मामले में बिन सलमान फंसे तो क्या जमाल ख़ाशुक़जी की हत्या का मुद्दा फिर से प्रबल रूप से उठ जाने की संभावना है?

कुछ टीकाकार कहते हैं कि बिन सलमान ने बेज़ोस के फ़ोन की जासूसी इसलिए की कि बेज़ोस के अख़बार वाशिंग्टन पोस्ट ने जमाल ख़ाशुक़जी हत्याकांड को इस तरह बढ़ चढ़कर कवरेज दी थी कि सऊदी अधिकारियों के लिए कहीं भी मुंह दिखाना कठिन हो गया था।

सऊदी अधिकारी तो बार बार कह रहे हैं कि सारे आरोप निराधार हैं लेकिन संयुक्त राष्ट्र संघ के अधिकारियों का साफ़ साफ़ कहना है कि इस बात के लक्षण मौजूद हैं कि बिन सलमान ने बेज़ोस के मोबाइल फ़ोन की जासूसी करवाई।

ब्रिटिश प्रधानमंत्री बोरिस जान्सन का कहना है कि वह भी इस मामले को पूरी गंभीरता से ले रहे हैं।

सऊदी सरकार को इस बात का भरोसा है कि अमरीका में ट्रम्प उसके ख़िलाफ़ किसी भी प्रकार की जांच नहीं होने देंगे लेकिन इस बीच अमरीका में सऊदी सरकार बहुत बुरी तरह बदनाम हुई है। अमरीकी सांसद इलहान उमर ने तो कहा कि ट्रम्प को सऊदी अरब की दलाली छोड़ देनी चाहिए।

इस बीच यह बात बड़ी अजीब है कि जेफ़ बेज़ोस पूरी तरह ख़ामोश हैं। ख़ाशुक़जी हत्याकांड से पहले तक सऊदी अरब में बेज़ोस के बहुत बड़े आर्थिक हित थे लेकिन ख़ाशुक़जी की हत्या के बाद वाशिंग्टन पोस्ट ने इस मामले में जो शैली अपनाई उसके कारण सऊदी अरब में बेज़ोस के सारे आर्थिक हित समाप्त हो गए।

अमरीका में सऊदी अरब समर्थक मैगज़ीन नेशनल इंक्वायरर पर फ़रवरी 2019 में बेज़ोस ने आरोप लगाया था कि वह बेज़ोस की छवि ख़राब करने की कोशिश कर रही है क्योंकि मैगज़ीन ने बेज़ोस और उनकी गर्ल फ़्रेन्ड के बीच आदान प्रदान किए गए संदेशों को प्रकाशित कर दिया था।

अब बेज़ोस के सामने यह रास्ता है कि अपने आर्थिक हितों की ख़ातिर ख़ामोश रहें और सऊदी सरकार के पास संभावित रूप से मौजूद अपने अन्य विवादित राज़ छिपाएं या वह ठोस सुबूत सामने लाएं जिनसे साबित हो जाए कि उनका फ़ोन हैक करने में ख़ुद बिन सलमान लिप्त हैं और फिर यह सुबूत बहुत सही समय पर वह दुनिया के सामने पेश करें। बेज़ोस की ख़ामोशी से सऊदी सरकार से जुड़े गलियारों में यह विचार प्रबल होता जा रहा है कि बेज़ोस के पास ठोस सुबूतों का अभाव है।

 

ख़ालिद जसूसी

फ़िलिस्तीन के वरिष्ठ पत्रकार